शराबी शिक्षक स्कूल में, शिक्षा विभाग सोता रहा!“हां, मैंने पी रखी है” कहने वाला शिक्षक महीनों से पढ़ा रहा बच्चे

Chautha Sthambh

शराबी शिक्षक स्कूल में, शिक्षा विभाग सोता रहा!
“हां, मैंने पी रखी है” कहने वाला शिक्षक महीनों से पढ़ा रहा बच्चे

By admin 3 फरवरी 2026
छिंदवाड़ा( चौथा स्तंभ)

छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड की शिक्षा व्यवस्था उस वक्त कटघरे में आ गई, जब ग्राम बंजारीगुड़ी स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक कुंवरलाल भारती का शराब के नशे में स्कूल पहुंचना उजागर हुआ। हैरानी की बात यह नहीं कि शिक्षक नशे में था, बल्कि यह है कि शिक्षा विभाग की जानकारी में होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अभिभावकों ने पकड़ा रंगे हाथ, विभाग ने बंद रखीं आंखें
मंगलवार को जब शिक्षक नशे की हालत में स्कूल पहुंचा, तो आक्रोशित अभिभावकों और ग्रामीणों ने उसे स्कूल में प्रवेश करने से रोका। आरोप है कि इसी दौरान शिक्षक ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए खुलेआम स्वीकार किया—


हां, मैंने शराब पी रखी है।”
सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इससे पहले विभाग को इसकी भनक नहीं थी?
ग्रामीणों का दावा है कि शिक्षक का यह रवैया नया नहीं, बल्कि लंबे समय से शिकायतें होती रही हैं, जो फाइलों में दबाकर रख दी गईं।
पंचनामा तो बना, लेकिन कार्रवाई कब?
घटना के बाद ग्रामीणों ने मौके पर पंचनामा तैयार कर शिक्षा विभाग को सौंपा। इसके बावजूद विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है।
अभिभावकों का कहना है कि जब उन्होंने शिक्षक को समझाने की कोशिश की, तो उसने यह तक कह दिया—


यहां कई आए और चले गए, मेरा कुछ नहीं हुआ।”
यह बयान सीधे-सीधे विभागीय संरक्षण की ओर इशारा करता है।
बच्चों की सुरक्षा से बड़ा क्या?
एक ओर सरकार स्कूलों में गुणवत्ता और अनुशासन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नशे में धुत शिक्षक बच्चों को पढ़ाते रहे और अधिकारी मौन बने रहे।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है—
क्या विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा था?
यदि कोई हादसा हो जाता, तो जिम्मेदार कौन होता?
क्या शराबी शिक्षक को बचाने की कोशिश की जा रही है?
जांच के नाम पर खानापूर्ति?
शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच की बात जरूर कही है, लेकिन ग्रामीणों को डर है कि यह जांच भी कागजों में ही सिमट कर न रह जाए।

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  • यह सिर्फ एक शिक्षक नहीं, पूरे सिस्टम पर सवाल है
    यह मामला केवल एक शराबी शिक्षक का नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की लापरवाही, निगरानी की विफलता और जवाबदेही से बचने की मानसिकता को उजागर करता है।
    अब देखना यह है कि विभाग वास्तव में कार्रवाई करता है या फिर एक बार फिर बच्चों के भविष्य को नजरअंदाज कर दिया जाएगा।

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