मैहर में कार्रवाई, छिंदवाड़ा में खामोशी?
स्कूलों में बिना टेंडर सप्लाई और निर्माण का मामला, हर्रई–तामिया तक फैला खेल
छिदंवाडा (चौथा स्तंभ)मैहर जिले में स्कूलों में नियमों के विरुद्ध फर्नीचर सप्लाई और निर्माण कार्यों को लेकर कलेक्टर द्वारा विकासखंड शिक्षा अधिकारी पर की गई सख्त कार्रवाई ने प्रदेश भर में हलचल मचा दी है। सवाल यह है कि क्या इसी तरह का एक्शन छिंदवाड़ा जिले में भी देखने को मिलेगा?
दरअसल, मैहर जिले में सामने आए मामले में बिना टेंडर, बिना स्वीकृति और नियमों को ताक पर रखकर स्कूलों में घटिया फर्नीचर की सप्लाई, साइकिल स्टैंड और टीन शेड निर्माण कराया गया था। कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी को निलंबित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा।
हर्रई और तामिया में भी वही कहानी!
सूत्रों के अनुसार, छिंदवाड़ा जिले के हर्रई और तामिया विकासखंडों में भी जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में ठीक इसी तर्ज पर फर्नीचर और अन्य सामग्री की सप्लाई की गई।
न तो टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई
न ही गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ
सीधे स्कूलों में घटिया सामान उतार दिया गया
इतना ही नहीं, कई स्कूलों में साइकिल स्टैंड और टीन शेड का निर्माण भी बिना स्वीकृति और तकनीकी प्रक्रिया के करा दिया गया।
भोपाल की कंपनी, जिले भर में सप्लाई
सबसे अहम बात यह है कि छिंदवाड़ा जिले के जनजाति कार्य विभाग के स्कूलों में सप्लाई करने वाली कंपनी “रेवा इंटरप्राइजेज” बताई जा रही है, जो भोपाल की कंपनी है।
सूत्र दावा कर रहे हैं कि इस पूरे सप्लाई खेल में भोपाल स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है, जिनके संरक्षण में कंपनी को सीधे काम सौंपा गया।
मिलीभगत के आरोप
सूत्र यह भी बताते हैं कि
जनजाति कार्य विभाग के प्रमुख अधिकारी
हर्रई और तामिया के विकासखंड शिक्षा अधिकारी
इन सभी की आपसी मिलीभगत से यह पूरा खेल अंजाम दिया गया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान और बच्चों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ हुआ।
अब बड़ा सवाल
जब मैहर जिले में इसी तरह के मामले पर कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई की,
तो क्या छिंदवाड़ा कलेक्टर भी हर्रई और तामिया के मामलों में संज्ञान लेंगे?
या फिर यह मामला फाइलों में दबाकर छोड़ दिया जाएगा?
जिले में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो कई बड़े नामों पर गाज गिर सकती है।

