दैनिक वेतन भोगियों के भरोसे नगर निगम का फायर अमला!…
आग लगे तो निगम के भरोसे रहना पड़ सकता है भारी…
छिदंवाडा (चौथा स्तंभ)इमलीखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की एक पाइप फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने नगर निगम के फायर विभाग के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलकर रख दी। आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक फैक्ट्री में लाखों का नुकसान हो चुका था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम का फायर विभाग, जो सीधे आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा से जुड़ा है, उसकी कमान एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के हाथों में है। यह आरोप किसी विपक्षी दल का नहीं, बल्कि खुद नगर निगम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति से सामने आया है।
प्रेस विज्ञप्ति में आग पर काबू पाने की पुष्टि जिस व्यक्ति ने की, उसका नाम कुलदीप बताया गया है, जिसे निगम ने कार्य सहायक लिखा है। सवाल यह है कि
क्या फायर जैसे संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी दैनिक वेतन कर्मियों के भरोसे छोड़ी जा सकती है?
क्या निगम के पास कोई स्थायी, प्रशिक्षित फायर अधिकारी नहीं है?…
और अगर किसी बड़े हादसे में जनहानि हो जाती, तो जवाबदेही किसकी होती?

नगर निगम मंचों पर आधुनिक संसाधन, प्रशिक्षित अमला और त्वरित कार्रवाई के दावे करता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि फायर विभाग की कमान ही अस्थायी व्यवस्था के भरोसे चल रही है।
इमलीखेड़ा की यह आग सिर्फ एक फैक्ट्री को नहीं जला गई, बल्कि नगर निगम की तैयारियों, प्राथमिकताओं और जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल छोड़ गई है।
नगर निगम के पास नहीं रहता पर्याप्त फायर केमिकल, नागपुर से लेना पड़ता है सहारा…
नगर निगम के पास आग बुझाने के लिए आवश्यक केमिकल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं रहता। आपात स्थितियों में नागपुर से केमिकल मंगाकर आग पर काबू पाने की कोशिश की जाती है। इस बात की पुष्टि नगर निगम के सहायक फायर ऑफिसर अभिषेक दुबे ने की है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभाग के पास आग बुझाने के लिए पर्याप्त केमिकल स्टॉक मौजूद नहीं था, जिसके चलते बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ा।

