दो सालों में लाखों की स्वीकृत, नहीं हो पाई आश्रम शाला भवन की मरम्मत…. आज भी खंडहर एवं जर्जर भवन में पढ़ने के लिए मजबूर आदिवासी बच्चे…?

Chautha Sthambh

दो सालों में लाखों की स्वीकृत, नहीं हो पाई आश्रम शाला भवन की मरम्मत….

क्षतिग्रस्त, खंडरनुमा आश्रम शाला में गुजर बसर करने मजबूर होंगे छात्र…

आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा (परासिया) का मामला..

लाखों रुपयें की स्वीकृत के बाद भी नहीं हो पाई आश्रम शाला भवन की मरम्मत..?

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  • विभागीय उपयंत्री दीपक और ठेकेदार की मिलीभगत…?
    By admin – 14 December 2026

    छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) शासन आदिवासियों के बच्चों के लिए बेहतर और अच्छी शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने प्रयासरत है। इसके लिए समय-समय पर करोड़ों रुपए के फंड भी आवंटित किए जाते हैं लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते शासन की राशि में किसी न किसी तरह से पलीता लगाया जा रहा है। ऐसा ही मामला देखने को मिला परासिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अंबाड़ा के आदिवासी बालक आश्रम में 50 सीटर भवन की मरम्मत एंव बाउंड्रीवॉल निर्माण के कार्य में लाखों रुपए खर्च कियें गयें । आश्रम शाला भवन की छत पर बेरिंगकोट, दीवारों में प्लास्टर बाउंड्रीवॉल सहित अन्य कार्य को ठेकेदार के माध्यम कराया गया था। लेकिन ठेकेदार ने इतना गुणवत्ताहीन काम किया की कुछ ही समय पर छत टूट कर गिरने लगी हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि ठेकेदार के द्वारा किया गया कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था। जिसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन विभागीय इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत के कारण कुछ नहीं हुआ और ठेकेदार को पूरा भुगतान हो गया। निर्माण की गुणवत्ता पर भी समय पर समय पर चौथा स्तंभ भी सवाल उठा रहा हैं।

    आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा की बिल्डिंग जर्जर एवं खंडहर मैं तब्दील…

    ना खिडक़ी, दरवाजे ना पूर्ण रूप से प्लास्टर, रंग रोंगन के अभाव में खंडहर में रहने जैसी अनुभूति। यह हाल इन दिनों परासिया क्षेत्र के आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा के बने हुए दिखाई दे रहे हैं। ऐसा नहीं की भवन को लेकर आवंटन में कमी की गई हो, बल्कि राशि स्वीकृत होने के बावजूद विभागीय उपयंत्री और ठेकेदार ने मिलकर स्वीकृत राशि में हेराफेरी कर गयें। अब निर्माण एजेंसी और जिम्मेदारों विभागीय उपयंत्री (इंजीनियर) की लापरवाही का खामियाजा यहां रहने वाले छोटे छोटे आदिवाही विद्यार्थियों को भुगताना पड़ रहा है । जिन्हें भारी अव्यवस्थाओं के बीच गुजर बसर करना पड़ रहा है

    आश्रम शाला भवन की बिल्डिंग जर्जर लेकिन लाखों रुपए की लागत से बना दी गई बाउंड्री वॉल…

    इन दिनों विभागीय इंजीनियर (उपयंत्री) चाँदी काटने में लगे हुए है। उन्हें इन आदिवासी समाज के बच्चों की कोई चिंता नही है। इसलिए तो आज आदिवासी बालक आश्रम शाला अंबाडा जर्जर एवं खंडहर अवस्था में देख रहा है। मरम्मत के लिए विभाग से लाखों रुपए स्वीकृत हुए लेकिन निगरानी करने वालें इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत के कारण आश्रम शाला भवन में सिर्फ कागजों में काम देख कर लाखों रुपए का बंदरबट कर दिया गया और जो छात्रावास में बाउंड्री वॉल बनी है वह भी टूटने की कगार में है इसमें भी इंजीनियर ने बिना स्थल निरीक्षण एंव मूल्यांकन के ठेकेदार को भुगतान करा दिया गया…

    आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा के खंडहर एवं जर्जर भवन में अभी भी 50 बच्चे निवासरत…?

    देख दीजिये मुख्यमंत्री जी जिलें में बैठे अधिकारी इन आदिवासी बच्चों की कैसे उपेक्षा करते नजर आ रहे है। इसलिए तो जर्जर एवं खंडहर भवन में आज भी इन आदिवासी के छोटे -छोटे बच्चे रहने के लिए मजबूर हैं ।और जिलें में बैठे जनजाति विभाग के अधिकारी इन आदिवासी बच्चों की जिदंगी से खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं जब तो ऐसे जर्जर एवं खंडहर भवन में इन बच्चों को आज भी रखा जा रहा है जबकि इन भवनों की छत से कभी भी मालवा गिरता रहता है कभी कोई बड़ी घटना घट सकती है…

    आश्रम शाला भवन की बिल्डिंग जर्जर फिर भी मरम्मत के नाम पर लाखों का बजट स्वीकृत….

    इन दिनों जनजातीय विभाग के छात्रावास एवं आश्रम शाला भवन की बिल्डिंग की मरम्मत के नाम पर खुली लूट चल रही है। क्योंकि कई छात्रावास एवं आश्रम शालाओं में तो मरमत का काम सिर्फ कागजों में दिखाकर लाखों रुपए का बंदर बांट किया जा रहा है और इस काम को अंजाम दे रहे है विभाग के इंजीनियर और ठेकेदार..?

    जुगाड़ से चलाया जा रहा काम….

    निर्माण ठेकेदार की लापरवाही के अलावा मनमानी भी देखने को मिल रही है। बताया गया कि जो मरम्मत का कार्य किया गया है, उनमें खिडक़ी, दरवाजे नए नहीं लगवाए जा रहे हैं। बल्कि जुगाड़ कर पुराने ही दरवाजे, खिड़कियों को वेल्डिंग, रिपेयर और डेंटिंग-पेंटिंग कर लगा दिया जा रहा है।और विभागीय इंजीनियर की मिलीभगत से ठेकेदार पूरी राशि निकल लेते है…

    सहातक आयुक्त ने भी विभागीय इंजीनियर एंव ठेकेदार को नोटिस जारी..

    पिछले दिनों सहायक आयुक्त ने जब परासिया विकासखंड के आदिवासी बालक आश्रम शाला का निरीक्षण किया तो यहां मरम्मत कर में भारी लापरवाही देखने को मिली इसके बाद सहायक आयुक्त ने विभागीय इंजीनियर एवं ठेकेदार को कारण बताओं नोटिस जारी…

    एपिसोड 2…

    अगले एपिसोड में देखें इंजीनियर एवं हर्रई के ठेकेदार की मिली भगत से कैसे हुआ लाखों रुपए का बंदरबट…

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