जनजाति विभाग के उपयंत्री (इंजीनियर ) का जलवा…. 10सालों से छिंदवाड़ा जिलें में है पदस्थ है उपयंत्री…

Chautha Sthambh

जनजाति विभाग के उपयंत्री (इंजीनियर ) का जलवा..?

10सालों से छिंदवाड़ा जिलें में है पदस्थ है उपयंत्री…

विभाग में काम करने वालें ठेकेदार और उपयंत्री की मिलीभगत..?
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ ) जिलें के जनजातीय विभाग में 10 सालों से एक ही जगह पदस्थ उपयंत्री (इंजीनियर ) इन दिनों खुलकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं। जिलें में इस समय करोड़ों रुपए के निर्माण कर चल रहे हैं जिसमें ठेकेदार और उपयंत्री के सांठगाठ के कारण निर्माण कर में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है और कई काम तो सिर्फ कागजों में संचालित हो रहे हैं, जिसका उदाहरण 2024 में जिलें के 50 छात्रावास में तीन करोड रुपये मरम्मत के लिए डाले गयें थे। जिसमें आधे से अधिक काम सिर्फ कागजों में दिखाकर राशि निकल गई ली गई और इस काम में विभाग के उपयंत्री दीपक की महत्वपूर्ण भूमिका थी, ठेकेदार के साथ सांठगाठ कर राशि निकल ली गई।

नये छात्रावास भवन के नाम से निकली गई राशि…

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  • जनजाति विभाग के उपयंत्री दीपक से ठेकेदार ने सांठगाठ के चलते कई ऐसे छात्रावास में भी राशि डाली गई तो अभी एक साल पहले ही नये भवन बने है उन छात्रावास में भी मरम्मत के नाम पर पाँच पाँच लाख डाले गये फिर अधीक्षक से पैसे दुसरे खाते में पैसा वापस ले लिया गया, जैसे सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास कुंडा, सीनियर बालक छात्रावास धोधरी और कई ऐसे छात्रावास है। जिसमें बिना मरम्मत के राशि ठेकेदार के खातों में भुगतान कर दिया गया..

    मोहखेंड और भंडारकुड छात्रावास में भी बिना काम के भुगतान

    दीपक इन दिनों ठेकेदार के साथ मिलकर खुले आम भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं पूरे जनजातीय विभाग के छात्रावासों एंव आश्रम शाला में मरम्मत के नाम पर लाखों का खेल चल रहा है और इस काम के विभागीय इंजीनियर की भूमिका मुख्य है क्योंकि इन काम का निरीक्षण खुद इंजीनियर साहब करते है और बिना मरम्मत के भी इंजीनियर साहब ठेकेदार को भुगतान करा देते है

    दीपक( इंजीनियर) और ठेकेदार खुलेआम रेस्टोरेंट एवं ढाबे में देखे जा सकते हैं…

    जनजातीय विभाग के इंजीनियर पर इन दिनों ठेकेदार खूब मेहरबानी कर रहे है कभी साहब के साथ ठेकेदार होटल ढाबो एंव रेस्टोरेंट में देखे जा सकते हैं विभागीय इंजीनियर छात्रावास में चल रहे मरम्मत का काम होटल एवं ढाबू में बैठकर उनका निरीक्षण कर लेते हैं और ठेकेदारों का भुगतान करा देते है…

    दस सालों से जनजाति विभाग छिंदवाड़ा में है पदस्थ इंजीनियर साहब…

    सूत्रों की जानकारी के अनुसार दस सालों से एक ही जगह पदस्थ रहने के कारण इंजीनियर की सभी ठेकेदार से अच्छे संबंध हो गये है इसलिए ठेकेदार के साथ मिलकर इन दिनों साहब खूब चाँदी कट रहे है। इनका हर काम में कमीशन फिक्स है। जानकारों के अनुसार उपयंत्री इन दिनों लाखो रुपये महिने ठेकेदार से कमीशन ले रहे है!

    विभागीय जाँच हुई तो निकलेगा लाखों का मामला….
    सूत्रों की जानकारी के अनुसार यदि पिछले दो तीन सालों में हुए निर्माण कार्य एवं मरम्मत के कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया तो लाखों रुपयें का फर्जी वाला निकलेगा.!

    आखिर क्यों नही हटाये गये छिंदवाड़ा से उपयंत्री को दस सालों से..
    शासन का नियम है कि कोई भी अधिकारी एक जिलें में तीन साल से अधिक एक जिले में नही रह सकते है लेकिन दीपक उपयंत्री पिछले दस सालों से छिंदवाड़ा जिले से आखिर क्यों नहीं हटायें गये ये समझ के बाहर है। जानकारों का कहना है कि छिंदवाड़ा जिले में रहने के लिए उपयंत्री महोदय हर साल विभाग के उच्च अधिकारी को अच्छा खासा चढ़ावा देते हैं। इसलिए तो दस सालों से छिंदवाड़ा में रहकर माल कमा रहे हैं..!

    छात्रावास एवं स्कूल में चले निर्माण कार्य का कभी नहीं करते स्थल निरीक्षक…

    उपयंत्री की लापरवाही के कारण आज जिलें के छात्रावास भवन में मरम्मत एंव नये बन रहे भवन का कभी निरीक्षण नहीं करते है जिसके कारण छात्रावास में चल रहे निर्माण मैं गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया जाता, जिसके शासन की राशि का खुलकर दुरुपयोग हो रहा है और निरीक्षण करने वाले अपने जेब भरने में लगें हैं

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