भ्रष्टाचारी के चंगुल में आश्रम शाला , आदिवासी समाज के बच्चों के नाम पर खुली लूट….
उपयंत्री और ठेकेदार के खिलाफ नोटिस जारी होने के बाद एफआर आई दर्ज क्यों नहीं..?
जान की बाजी लगाकर आश्रम शाला में पढ़ने के लिए मजबूर आदिवासी बच्चे….
रिपोर्ट-ठा. रामकुमार राजपूत
दिनांक-13/01/2025
चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) जिलें के जनजातीय विभाग में इन दिनों भ्रष्टाचार चरम पर देखने को मिल रहा है, यंहा विभाग के इंजीनियर (उपयंत्री ) और ठेकेदार ने आश्रम शाला और छात्रावास में मरम्मत के नाम खुली लूट मजा रखी है लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नही है ऐसा ही मामला परासिया विकासखंड में जनजातीय विभाग के द्वारा संचालित आदिवासी बालक आश्रम की मरम्मत के नाम पर तीन सालों में विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर दी लेकिन अभी भी व्यवस्था जस की तस बनी हुई है,

सहायक आयुक्त ने निरीक्षण करने के बाद उपयंत्री और ठेकेदार को नोटिस…
सहायक आयुक्त सतेंद्र सिंह मरकाम ने पिछले दिनों आदिवासी बालख आश्रम अंबाडा का निरीक्षण किया जिसमें
आश्रम परिसर में चल रहे मरम्मत कार्यों का गहन निरीक्षण किया गया। जिसमें कई कमी देखी गई जिसके बाद सहायक आयुक्त ने विभाग के इंजीनियर और ठेकेदार को नोटिस जारी किया और
। मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की गई, जिसमें समाचार पत्रों में प्रकाशित तथ्यों की भी जांच की गई। जांच में कार्यों में अनियमितता एवं गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर उप यंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा संबंधित ठेकेदार को उनके कर्तव्यों में लापरवाही के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे..
आदिवासी बालक आश्रम शाला अंबाडा में लाखों रुपए मरम्मत के नाम पर खर्च….
जी हाँ हम बात कर रहे है जनजातीय विभाग द्वारा संचालित आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा की जंहा दो सालों में मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी अभी स्थिति जस की तस्वीर बनी है लेकिन विभाग ने उपयंत्री को सिर्फ नोटिस देकर खानापूर्ति कर लिया जबकि ऐसे लापरवाही उपयंत्री (इंजीनियर) एंव ठेकेदार के खिलाफ गबन का मामला दर्ज होना चाहिए आखिर जिम्मेदार उपयंत्री ने बिना स्थल निरीक्षण के ठेकेदार को लाखों का भुगतान कैसे करा दिया…!
आदिवासी विभाग कर रहा छोटे छोटे बच्चों की जान से खिलवाड़…?
जिले के जनजातीय विभाग द्वारा संचालित अबाडा आश्रम शाला में पढ़ाई के नाम पर आदिवासी समाज के छोटे बच्चों के भविष्य और जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। परासिया विकास खंड क्षेत्र अंतर्गत आदिवासी बालक आश्रम शाला अंबाडा के भवन की हालत खस्ता हो चुकी है। आश्रम शाला किसी भी वक्त धराशाई हो सकता है। आश्रम शाला भवन के नाम पर खंडहर भवन की छत सड़ चुकी है और कालम झुक गए हैं। आलम यह है कि हाथ लगाने मात्र से छत का मलबा ढह जाता है। बावजूद इसके जर्जर हो चुके भवन में ही आश्रम शाला का संचालन किया जा रहा है।
आश्रम शाला में बैठकर पढ़ रहे बच्चे….
स्कूल चलें हम…सब पढ़ें-सब बढ़ें और सर्व शिक्षा अभियान जैसे तमाम सरकारी दावों की पोल खोलती तस्वीर आश्रम शाला अंबाडा की है। यहां इलाके के गरीब आदिवासी नन्हे-मुन्ने छात्र जर्जर हो चुके छत के नीचे दहशत के साए में पढ़ने एंव रहने को मजबूर हैं। कहने को तो आश्रम शाला में कई कमरे हैं, लेकिन पूरे आश्रम शाला के कमरे की छत कभी भी गिर जाती है, एक कमरें में ही रात में छात्रों को रखते है और बरामदे की भी हालत खराब है, आश्रम शाला में जहां पहली से लेकर पांचवी क्लास के बच्चों को रहने एवं पढ़ने की यंहा व्यवस्था होती है जहां इन छात्रों को यहां रखकर पढ़ाया जाता है।

