आदिवासी समाज के बच्चों के नाम पर लूट की पाठशाला..!
जनजातीय विभाग में छात्रावास भवन एंव स्कूल मरम्मत के नाम पर खुली लूट…?
मरम्मत की फाइलों में झूठ की इमारत, अब क्या करेंगे मुख्यमंत्री जी जाँच..?
चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जनजातीय कार्य विभाग इन दिनों खूब सुर्ख़ियों में चल रहा है, यंहा आयें दिनों कुछ ना कुछ होता ही रहता है, ऐसा ही एक मामला अब निकलकर आ रहा है कि जनजातीय विभाग द्वारा संचालित छात्रावास भवन मरम्मत में भरी गोलमाल किया गया है जंहा विभागीय उपयंत्री (इंजिनियर)और ठेकेदारों की मिलीभगत से मरम्मत के नाम पर लाखों की लूट चल रही है। छात्रावास भवन की मरम्मत नये भवन एंव स्कूल भवन के नाम पर सरकारी खजाने का ठेकेदार, विभागीय इंजीनियर एंव अफसरों के द्वारा सरकारी राशि का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है।
प्रशासनिक स्वीकृति कहीं और की और काम कहीं दूसरी जगह…?
सूत्रों की जानकारी के अनुसार वर्ष 2024- 25 में जनजातीय विभाग द्वारा 50 छात्रावास की मरम्मत के लिए तीन करोड़ रुपये आयें थे, जिसमें एक छात्रावास को 5 लाख रुपये की राशि मरम्मत के लिए डाली गई थी, लेकिन इस राशि का भी विभागीय इंजीनियर एंव ठेकेदार एंव अफसरों ने मिलकर कागजों में ही छात्रावासों की मरम्मत कर दिया। जानकारों के अनुसार कई ऐसे भी छात्रावास थे जो अभी एक साल पहले ही बनकर तैयार हुए हैं उनके नाम से भी मरम्मत के नाम पर पैसे निकाल लिए गए। इतना घोटाला देख सिर चकरा जाए। अब सोचिए, अगर जनजातीय विभाग द्वारा जो छात्रावास भवन में मरम्मत कार्य कराए गए एवं जो नए छात्रावास भवन का निर्माण हो रहे हैं। इन सभी कार्यों की जांच हो जाए, तो घोटालों का भंडार फूट पड़ेगा। स्कूल की छतें गिरें या बच्चे ज़मीन पर बैठें, मगर ठेकेदार एंव उपयंत्री (इंजीनियर )की जेबें फूली रहें – यही है मध्यप्रदेश में शिक्षा की असली स्कीम?”सरकार कब जागेगी, ये पूछने से पहले सवाल ये है कि क्या कोई वाकई जागना चाहता भी है?
जनजातीय विभाग के छात्रावास में मरम्मत कार्य,स्कूल भवन की बाउंड्री वॉल, एंव नये छात्रावास भवन एंव स्कूल भवन के निर्माण
एवं मरम्मत कार्य के नाम पर तो ऐसा तमाशा हुआ कि नियम, प्रक्रिया, और नैतिकता सबको जमीन में दफना दिया गया।
उपयंत्री (इंजीनियर) छात्रावास भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण नहीं कर रहा…
जिलें में पदस्थ उपयंत्री (इंजीनियर) छात्रावास भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिससे घटिया निर्माण, गुणवत्ताहीन कार्य हो रहा हैं, जिसके कारण कई छात्रावास भवन आज जर्जर हो गए हैं लेकिन फिर भी विभागीय अधिकारी कभी भी इनकी जांच नही करते है, यह स्थिति निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठाती है।

विभागीय उपयंत्री (इंजीनियर)एंव ठेकेदारों फलफूल रहे…
सूत्रों का कहना है कि सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग छिंदवाड़ा में बरसों से पदस्थ (उपयंत्री) इंजीनियर और ठेकेदार मिलकर इन दिनों खूब माल कमा रहे हैं,क्योंकि जब विभाग का इंजीनियर ही ठेकेदार के साथ हाथ मिल ले तो फिर संबंधित निर्माण करने वाली एजेंसी को डर किसका है क्योंकि विभागीय इंजीनियर कभी स्थलों का निरीक्षण नही करता है, जिसमें संबंधित एजेंसी इसी का फायदा उठाकर गुणवत्ताहीन काम करती है। जिसमें उन्हें ज्यादा प्रॉफिट होता है, विभागीय इंजीनियर ऑफिस एवं रेस्टोरेंट में बैठकर इन ठेकेदारों के भुगतान पंजी पर साइन कर देता है…

छात्रावास एंव आश्रम शाला भवन मरम्मत के नाम पर लाखों का घोटाला…
वहीं सूत्रों की जानकारी के अनुसार जनजाति कार्य विभाग के द्वारा अंबाला आश्रम शाला मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए की राशि भवनों के मरम्मत के नाम पर निकली जा चूकि है लेकिन ठेकेदार द्वारा काम नहीं किया गया इसीलिए आश्रम शाला भवन अंबाडा सिर्फ खंडार में तब्दील होते देख रही है यंहा पर मरम्मत का कोई भी काम नहीं हुआ है. सिर्फ पुताई कर दी गई है. वही आदिवासी समाज के लोगों ने भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाते हुए जनजातीय विभाग एंव प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।
हर्रई ब्लॉक के स्कूल एवं छात्रावास में पुताई के नाम पर लाखों की लूट……
जिलें के आदिवासी विकासखंड हर्रई के जनजातीय विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एंव सरकारी स्कूल में इस वर्ष पुताई एवं मरम्मत के नाम विभाग के द्वारा हर स्कूल /छात्रावास में दो लाख से लेकर पाँच लाख तक की राशि दी गई थी जिसमें ठेकेदार को स्कूल में मरम्मत एंव पुट्टी कर इन स्कूल एंव छात्रावास में पुताई कार्य करना था लेकिन विभागीय इंजीनियर एंव ठेकेदार की मिलीभगत के कारण इन जगहों पर सिर्फ साधारण पुताई करके इति श्री कर दिया। क्योंकि विभाग के उपयंत्री ( इंजीनियर ) ने कभी स्थल निरीक्षण नही किया और संबंधित ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया गया

