जनजातीय कार्य विभाग में बड़ा घोटाला
बिना टेंडर–कोटेशन लाखों की सप्लाई, महीने भर में सामान खराब होने लगा..?
रिपोर्ट -ठा. रामकुमार राजपूत
मोबाइल -8989115284
चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा ) जिले के जनजातीय कार्य विभाग में गंभीर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग के सहायक आयुक्त, कार्यालय के बाबू और कुछ स्कूल प्राचार्यों ने आपसी सांठगांठ कर भोपाल की रेवा इंटरप्राइजेस के माध्यम से लाखों रुपये का सामान बिना किसी टेंडर और कोटेशन प्रक्रिया के स्कूलों में सप्लाई करा दिया।

जानकारी के अनुसार यह पूरा खेल हर्रई और तामिया विकासखंड के शासकीय आदिवासी हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में अंजाम दिया गया। स्कूलों में जबरन उतारा गया फर्नीचर और अन्य सामग्री की क्वालिटी बेहद घटिया बताई जा रही है। हालत यह है कि सिर्फ एक महीने के भीतर ही कुर्सियां, डेस्क-बेंच, आलमारी और रैक टूटने लगे हैं।

नियमों को ताक पर रखकर सप्लाई
सूत्रों के मुताबिक शासकीय नियमों के अनुसार किसी भी प्रकार की खरीदी के लिए ई-टेंडर, कोटेशन और तकनीकी स्वीकृति अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में न तो टेंडर निकाला गया और न ही स्कूल प्रबंधन से विधिवत मांग-पत्र लिया गया। इसके बावजूद लाखों का भुगतान प्रक्रिया में होने की बात सामने आ रही है।

स्कूल प्रबंधन में नाराजगी
कुछ स्कूल प्राचार्यों और शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अनजान लोग ट्रक लेकर स्कूल पहुंचे और सामान रखकर चले गए। घटिया सामान का विरोध करने पर “ऊपर से आदेश” होने की बात कहकर दबाव बनाया गया।

जांच की मांग तेज।
मामले के सामने आने के बाद अब जिले में हड़कंप मचा हुआ है। सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच,जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल भुगतान पर तत्काल रोक,दोषियों पर एफआईआर
की मांग की है।
सवालों के घेरे में विभाग
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना टेंडर सप्लाई का आदेश किसने दिया?
भुगतान किस आधार पर किया गया?
घटिया सामान की गुणवत्ता जांच किसने की?
यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला आदिवासी छात्रों के हक और सरकारी खजाने की लूट का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

