आबकारी ऑफिस से दिनदहाड़े शराब तस्कर को छुड़ा ले गए परिजन और सिंडिकेट के आदमी…

Chautha Sthambh

आबकारी ऑफिस से दिनदहाड़े शराब तस्कर को छुड़ा ले गए परिजन और सिंडिकेट के आदमी…

आखिर नाकाम क्यों साबित हो रहा है सिंडिकेट के सामने आबकारी….
चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) जिले में इन दोनों शराब तस्करी चरम सीमा पर है, ऐसा ही मामला आज देखने को मिला जंहा
आबकारी विभाग के निकम्मेपन का साक्षात् उदाहरण देखने को मिला .

कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान…

मोहखेड़ में आबकारी विभाग ने कार्रवाई करते हुए शराब तस्कर को गिरफ्तार किया परंतु तस्कर के परिजन और सिंडिकेट के आदमी दिनदहाड़े आरोपी को आबकारी विभाग से के ऑफिस से छुड़ाकर कर ले गए । इस दबंगई से सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं।

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  • ​ जिले में अवैध शराब के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद जो घटनाक्रम हुआ उसने विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

    ​बीती रात लगभग 10 बजे, आबकारी टीम ने मुखबिर की सूचना पर मोरडोंगरी रोड पर घेराबंदी की। यहाँ से ग्राम पटनिया (तहसील मोहखेड़) निवासी प्रहलाद चंद्रवंशी पिता कन्हैया चंद्रवंशी को रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी के कब्जे से 9 पेटी अवैध शराब जब्त की गई है।


    ​प्रहलाद चंद्रवंशी क्षेत्र का एक पुराना और शातिर खिलाड़ी माना जाता है। लंबे समय से वह अवैध शराब के कारोबार में लिप्त था और हर बार पुलिस व आबकारी विभाग को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो जाता था। विभाग ने इस बार मुस्तैदी दिखाते हुए उस पर आबकारी एक्ट की धारा 34/2 के तहत मामला दर्ज किया है।

    ​कार्रवाई जितनी सफल रही, उसके बाद का घटनाक्रम उतना ही चौंकाने वाला था। जिला मुख्यालय स्थित आबकारी कंट्रोल रूम से आरोपी के परिजनों और शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने मिलकर प्रहलाद को छुड़ा लिया।



    सिंडिकेट के गुर्गों ने सरकारी दफ्तर में घुसकर आरोपी को छुड़ाने का साहस किया।
    ​जिला मुख्यालय जैसे संवेदनशील स्थान से आरोपी का फरार हो जाना आबकारी विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में शराब माफिया और सिंडिकेट के हौसले कितने बुलंद हैं।

    ​जहाँ एक ओर विभाग 9 पेटी शराब पकड़ने की पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी ओर आरोपी का कस्टडी से गायब होना पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाता है। क्या यह केवल लापरवाही है या इसके पीछे कोई गहरी मिलीभगत? यह जांच का विषय है।

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