कभी स्कूल में शिक्षक तो कभी छात्रावास में चपरासी पी रहे हैं शराब, आखिर जिम्मेदार कहा…?

Chautha Sthambh

आदिवासी छात्रों का भविष्य अंधकार में….

कभी स्कूल में शिक्षक तो कभी छात्रावास में चपरासी पी रहे हैं शराब, आखिर जिम्मेदार कहा…?
चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला के आदिवासी विकास खंड में इन दिनों आदिवासी छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में है जिसकी मुख्य वजह है जिले में बैठे अधिकारी का स्कूलों में एवं छात्रावासों में नियंत्रण न होना। क्योंकि आज स्कूल शिक्षकों की लापरवाही चरम पर आयें दिनों स्कूल में शराब के नशे में शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं। जिससे यंहा पढने वाले छात्र/छात्राओं का भबिष्य अंधकार में है और जिले में बैठे सहायक आयुक्त सिर्फ शिक्षकों को निलंबित कर आपना कर्तव्य पूरा करते नजर आ रहे हैं, विभाग ने इन स्कूलों के निरीक्षक के लिए जो अधिकारी ब्लॉक में पदस्थ किये वो सिर्फ अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं कभी इन आदिवासी छात्र-छात्राओं के भविष्य को उनकी कोई चिंता नहीं है इसलिए तो आज जिले में आदिवासी समाज के बच्चों का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है..?
जिलें के छात्रावास में भी शराब के कई मामले आ चूके है सामने…?

जी हाँ बात कर रहे है जनजातीय विभाग द्वारा संचालित छात्रावास में इन दिनों शिक्षक एवं चपरासी आए दोनों शराब पीकर छात्रावास में आ रहे हैं जिसके कारण यहां रहकर पढ़ने वाले बच्चे भी पढ़ाई नहीं कर पाते और यहां पर चपरासी एवं शिक्षक रात दिन शराब के नशे में हंगामा करते रहते हैं लेकिन इन छात्रावासों का निरीक्षण की जिम्मेदारी जिन्हें मिली है वो कभी इन छात्रावासों का निरीक्षण नहीं करते और पूरे महीने सहायक आयुक्त ऑफिस में बैठकर अपनी नौकरी कर रहे हैं। उन्हें इन आदिवासी बच्चों की कोई चिंता नहीं है। दो दिन पहले भी अमरवाड़ा छात्रावास में चपरासी द्वारा छात्रों के साथ प्रताड़ना की घटना सामने आई थी जिसके बाद सहायक आयुक्त ने चपरासी को निलंबित कर दिया था लेकिन निगरानी करने वालें कहा है ऐसी धटना आखिर छात्रावाह समाने क्यों आ रही आखिर जिम्मेदार अधीक्षक के भरोसे इन बच्चों की जिम्मेदारी होती है वो क्या छात्रावास में नही रहते है। आखिर अधीक्षक के रहते चपरासी शराब के नशे में कैसे पहुंच जाते हैं छात्रावास अधीक्षक इन पर कोई कार्रवाई नहीं करते है या फिर चपरासी पर अधीक्षक का कोई नियंत्रण नहीं रहता,ऐसा ही मामला आज चौरई विकासखंड के आदिवासी सीनियर छात्रावास कुंडा में देखने को मिला जंहा शराबी चपरासी से छात्रावास के छात्र प्रताड़ित हो रहे थे जिसकी शिकायत के बाद चपरासी को निलंबित कर दिया गया

भृत्य को किया गया निलंबित..

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  • सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री सतेंद्र मरकाम द्वारा आदिवासी बालक छात्रावास कुण्डा, विकासखंड चौरई में पदस्थ भृत्य श्री विवेक धुर्वे को कर्तव्य में लापरवाही एवं अनुशासनहीन आचरण के कारण निलंबित करने के आदेश जारी किए गए हैं। सहायक आयुक्त श्री मरकाम ने बताया कि अधीक्षक आदिवासी बालक छात्रावास कुण्डा द्वारा पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया कि संबंधित कर्मचारी मादक पदार्थ का सेवन कर ड्यूटी पर उपस्थित होते है, बिना सूचना के अनुपस्थित रहते है, अधीक्षक से विवाद करते है तथा मादक पदार्थ सेवन के उपरांत ग्रामवासियों से भी अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न करते है। बार-बार समझाइश देने के बावजूद उसके व्यवहार में कोई सुधार नहीं पाया गया है।
    जांच में यह कृत्य कर्तव्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक पाए जाने के साथ मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियमों के विरुद्ध होकर कदाचार की श्रेणी में माना गया। इसके फलस्वरूप मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत श्री विवेक धुर्वे को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में संबंधित कर्मचारी का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी हर्रई नियत किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार निलंबन भत्ते की पात्रता रहेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

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