नौकरी बचाने के लिए खुद की बेटी को बताया दूसरे की संतान…

Chautha Sthambh

चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिलें में आज एक मामला समाने आया है। जंहा एक शिक्षक ने आपनी नौकरी बचाने के लिए पहले तो सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाया और बाद में जब नौकरी पर बन आई तो अपने जिगर के टुकड़े को ही दूसरे की संतान बता डाला यह वाक्या है छिंदवाड़ा के एक छात्रावास अधीक्षक (शिक्षक )का जिसने अपनी नौकरी बचाने के लिए अपनी बेटी को ही अपने भाई की बेटी बता डाला अब पाँच साल की बेटी अपने पिता का अधिकार पाने के लिए की ठोकरे भटक रही हैं।

नौकरी बचाने के लिए खुद की बेटी को बताया दूसरे की संतान।

हर्रई के छात्रावास में पदस्थ अधीक्षक कैलाश सूर्यवंशी की शिकायत उसकी पत्नी ने कलेक्टर कार्यालय में की पत्नी सुषमा सूर्यवंशी ने बताया कि उनकी शादी 2019 में हुई पूरे रीति रिवाज से गांव में हुई थी पहली पत्नी से कैलाश सूर्यवंशी का तलाक हो चुका था लेकिन फिर बाद में कैलाश सूर्यवंशी ने पहली पत्नी को अपना लिया और इन्हें छोड़ दिया उनकी एक 5 साल की बेटी है पहली पत्नी से दो बच्चे होने की वजह से जब दूसरी पत्नी से तीसरी संतान हुई तो इन्होंने अपनी इस बेटी को सरकारी कागजों में अपने भाई की बेटी बता डाला क्योंकि सरकारी नियम था कि अगर तीसरी संतान होती है तो नौकरी जा सकती है अब वही 5 साल की बेटी अपनी मां के साथ अपने पिता का नाम पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है कलेक्टर कार्यालय में पहुंची मां बेटी रो-रोकर अपना दर्द बयां कर रही थी।

स्कूल में पूछ रहे बच्चे के पिता का नाम।

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  • सुषमा सूर्यवंशी ने बताया कि उसकी बेटी अब स्कूल पढ़ने जाने की तैयारी कर रही स्कूल में उसका दाखिला करवाना है लेकिन स्कूल के दस्तावेजों के लिए समग्र आईडी की जरूरत है समग्र आईडी में उसके पिता का नाम नहीं है जब इस मामले में वह हर्रई पहुंची और उसने आवेदन दिया तो उसके पति कैलाश सूर्यवंशी ने उसके साथ मारपीट की।

    कोर्ट में चल रहा है मामला इसलिए कुछ भी नहीं कहूंगा।
    सुषमा सूर्यवंशी ने कहा कि मैं अपना और अपनी बेटी के भरण पोषण के अधिकार के लिए न्यायालय में मामला दर्ज किया है वहां पर मामला विचाराधीन है लेकिन फिलहाल उसकी बेटी की पढ़ाई के लिए पिता का नाम जरूरी है ऐसे में वह कलेक्टर कार्यालय सहित सभी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट चुकी है इस मामले में सुषमा सूर्यवंशी के पति कैलाश सूर्यवंशी का कहना है कि हमने न्यायालय की शरण ली है न्यायालय से जो निर्णय होगा उसके बाद मैं कुछ कह पाऊंगा।

    छिदंवाडा में पहले भी एक दिन के बच्चे को जिंदा दफनाया था।

    दरअसल सरकारी नियम था कि 26 जनवरी 2001 के बाद अगर किसी भी सरकारी कर्मचारी की तीसरी संतान होती है तो उसे नौकरी से बेदखल किया जाएगा इसी के डर से कुछ महीने पहले हर्रई में एक शिक्षक ने जब उसकी तीसरी संतान हुई तो उसने अपने मासूम बच्चे को जिंदा ही दफना दिया था जो मामला भी काफी सुर्खियों में था।

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