श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वी शहीदी दिवस व वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य मे वीर बाल पथ संचलन….

Chautha Sthambh

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वी शहीदी दिवस व वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य मे वीर बाल पथ संचलन….

गुरु तेग बहादुर न होते, तो ना हिंदू बचता और ना ही सिक्ख…

वीर साहिबजादों का सर्वोच्च त्याग, आज भी प्रेरणास्रोत…

चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छिंदवाड़ा जिला बालकार्य विभाग द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वी शहीदी दिवस व वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य विशाल वीर बाल पथ संचलन का आयोजन पुलिस ग्राउंड से किया गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला बाल कार्य प्रमुख ठा. राजा सिंह राजपूत ने बताया की वीर बाल पथ संचलन दोपहर 3 बजे पुलिस ग्राउंड से प्रारम्भ होकर -अमित ठेंगे चौक -इंदिरा तिराहा -डॉ. अम्बेडकर चौक(सत्कार तिराहा )-बीएसएनएल ऑफिस – इंडियन कॉफी हॉउस होते हुए पुनः पुलिस ग्राउंड मे समापन हुआ. संचलन के पश्चात ग्राउंड मे बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वी शहीदी दिवस है श्री गुरु तेग बहादुर जी सिक्खों के नौवें गुरु थे अटूट आस्था और 1675 में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उनकी शहादत के बारे में है,

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  • विशेष रूप से मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा जबरन धर्मांतरण का सामना कर रहे कश्मीरी पंडितों के लिए। मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए उनके बलिदान के कारण उन्हें ” हिंद की चादर” की उपाधि मिली. गुरु तेग बहादुर का त्याग केवल किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत की आत्मा की रक्षा के लिए था। यदि गुरु तेग बहादुर न होते, तो ना हिंदू बचता और ना ही सिख, बल्कि पूरा भारत ही समाप्त हो गया होता। उन्होंने आगे कहा की सिक्खों के दसवें गुरु और खालसा के संस्थापक गुरु गोविंद सिंह जी थे उनके चार वीर पुत्र थे, जिन्हें सामूहिक रूप से चार साहिबजादे कहा जाता है। अजीत सिंह का जन्म माता सुंदरी से हुआ था, जबकि जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह का जन्म माता जीतो से हुआ था। सन् 1704 में, चार वीर युवा साहिबजादों ने महान धर्मयुद्ध की वेदी पर अपना बलिदान दिया।

    दो वरिष्ठ साहिबजादे – अजीत सिंह और जुझार सिंह ने चमकौर के युद्ध में मुगलों के विरुद्ध वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहीद हुए । उनके छोटे साहिबजादे – जोरावर सिंह और फतेह सिंह, जिनकी आयु क्रमशः मात्र 9 और 7 वर्ष थी, उनको सरहिंद के नवाब ने बंदी बना लिया और अत्यंत निर्मम तरीके से जिंदा ही दीवार में चुनवा दिया । उनकी दादी माता गुजरी यह समाचार सहन नहीं कर सकीं और उनका देहांत हो गया। इन चार युवा शहीदों – चार साहिबजादों का सर्वोच्च बलिदान इतिहास में अद्वितीय है और आज भी प्रेरणा और श्रद्धा का स्रोत बना हुआ है।


    वीर बाल संचलन का जगह जगह समाज के बंधुओ द्वारा पुष्पवर्षा, आतिशबाजी व स्वागत किया गया कार्यक्रम के समापन पर सभी को रामखिचड़ी का वितरण किया गया.
    कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक लखन सिंह,नगर के अन्य दायित्ववान व समस्त स्वयंसेवक, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि, मातृशक्तियां तथा नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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