धान उपार्जन के लिए नही बनीं चेक पोस्ट दुसरे जिलें से आ रही धान….

Chautha Sthambh

धान उपार्जन के लिए नही बनीं चेक पोस्ट दुसरे जिलें से आ रही धान….

प्रशासनिक अमला नहीं ले रहा सुंध

चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) छिंदवाड़ा जिलें में खरीफ विपणन वर्ष 2025- 26 में समर्थन मूल्य पर धान ज्वार एवं बाजार उपार्जन के दौरान अवैधानिक रूप से खाद्यान्न लाकर विक्रय करने तथा बिचौलियों द्वारा फर्जी पंजीयन कराकर समर्थन मूल्य पर विक्रय की रोकथाम नहीं की जा रही है, छिंदवाड़ा जिलें में बिचौलियों द्वारा किसानों से पैसे देकर उनका पंजीयन ले लेते है। और दुसरे जिलें की धान हमारे जिलें में लेकर आ रहे लेकर समर्थन मूल्य पर धान विक्रय की रोकथाम के उद्देश्य से विभाग के द्वारा कोई आवश्यक निर्देश जारी नहीं किए गए हैं जिसका फायदा इन दोनों जिले में बिजोलिया उठा रहे हैं ज्ञात हो कि जिले में 1 दिसंबर से धन उपार्जन का कार्य प्रारंभ हो चुका है। जिले में इनका पालन नही हो रहा है, जिसके कारण बिजोलिया के द्वारा इन केंद्र पर धान की विक्री की जा रही है शासन की शिथिलता इन अवैध परिवहन कर्ताओं के लिए सहयोगी सिद्ध हो रहा है वर्तमान समय में धान पिपरिया होशंगाबाद से आ रही है ऐसा ही हर्रई ब्लाक में भी नरसिहपुर से अवैध धान आ रही है लेकिन रोकने वाला कोई नही…

जिले के हर्रई एवं तामिया में बिजोलिया सक्रिय….
जिलें में सबसे ज्यादा बिजोलिया इन दोनों तबिया ब्लॉक के झिरपा चावलपानी एवं हर्रई ब्लॉकों के खरीदी केंद्र में देखने को मिल रहे हैं

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  • समिति प्रबंधक खुद करवाते हैं बिचौलियों के लिए किसानों का पंजीयन उपलब्ध…?

    जिलें के इन केंद्रों में देखा गया है कि यंहा पदस्थ समिति प्रबंधक ही इन बिचौलियों के लिए क्षेत्र के किसानों का पंजीयन उपलब्ध कराते हैं जिसके लिए किसानों को कुछ पैसे देकर उनका पंजीयन खरीद लिया जाता है और उसके बाद इन किसानों के पंजीयन में धान की ब्रिकी की जाती है। जिसमें समिति प्रबंधक से लेकर बिचौलियों तक सब की कमीशन सेट है..

    एक बोरी में 40 की जगह 41 किलो से अधिक धान…

    सूत्रों की जानकारी के अनुसार इन दिनों जिलें में चल रही धान खरीदी केंद्र में तुलाई के दौरान भारी अनियमितताएं की जा रही हैं। सरकारी नियमों के अनुसार एक बोरी में 40 किलोग्राम धान भरा जाना चाहिए, लेकिन केंद्र पर किसानों की मौजूदगी में ही बोरियों में 41 किलोग्राम या उससे अधिक धान भरवाया जा रहा है।

    किसानों का कहना है कि अधिक वजन होने के बावजूद बोरियों पर 40 किलोग्राम का ही टैग लगाया जा रहा है। इससे हर बोरी में एक से डेढ़ किलोग्राम धान का नुकसान हो रहा है, जिससे किसानों की मेहनत की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

    विरोध करने पर तुलाई रोकने का आरोप….
    सूत्र बताते हैं कि किसानों के द्वारा जब उन्होंने इस गड़बड़ी का विरोध किया तो केंद्र के कर्मचारियों ने धान की तुलाई रोक दी। किसानों को साफ शब्दों में कहा गया कि अगर तौल करानी है तो इसी तरह होगी, नहीं तो अपनी उपज वापस ले जाएं।

    ठंड के मौसम में कई दिनों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे किसान इस तरह की धमकियों के कारण मजबूर नजर आए। किसानों का कहना है कि उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।

    हम्माली खर्च भी किसानों से लिया जा रहा….
    सूत्र बताते हैं कि इन दिनों धान खरीदी केंद्र में किसानों से ही धान की तुलाई के पैसे ले रहे, जबकि नियमों में तुलाई, सिलाई और लोडिंग का खर्च प्रशासन द्वारा वहन किया जाना चाहिए, लेकिन जिलें की खरीदी केंद्र पर उनसे तुलाई और बोरी भरने का खर्च भी वसूला जा रहा है। विरोध करने पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के भी आरोप लगाए गए हैं। छोटे किसानों का कहना है कि अतिरिक्त वजन और अवैध वसूली के कारण वे कर्ज के बोझ में दबते जा रहे हैं।

    पूरे जिले में हो रही कटौती….

    इस मामले को लेकर सूत्र बताते हैं कि यह केवल एक खरीदी केंद्र की समस्या नहीं है। पूरे जिले में इसी तरह किसानों की धान पर कटौती की जा रही है और खरीदी प्रभारी मनमानी कर किसानों को ठग रहे हैं।

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