कागजों पर जागरूकता, ठगे जा रहे उपभोक्ता….
कमरे के अंदर हो रहा है उपभोक्ता जागरूकता संरक्षण दिवस…
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) जिले के गरीब लोग आज राशन के लिए दर-दर भटक रहे हैं। और जिलें के अधिकारी कमरों में उपभोक्ता संरक्षण दिवस मना रहे हैं। तो आप समझ सकते हो कि जिलें के लोगों कैसे जागरूक होंगे होगें, आज जिलें के लोगो में
जागरूकता का अभाव है। लेकिन अधिकारी औपचारिकता निभाने तक सिमटे हैं। न किसी उपभोक्ता को जागरूक किया जा रहा है और न ही उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताया जा रहा है। जागरूकता अभियान कागजों तक सिमटकर रह गया है। इसका खामियाजा आम लोगों को भोगना पड़ रहा है।

तामिया और चौरई में खाद्यान्न के लए भटक रहे उपभोक्ता….
बीतने को अब सिर्फ एक सप्ताह शेष, अब तक नहीं पहुंचा चावल…
जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थिति गड़बड़ नजर आ रही है। अफसरों की अनदेखी के चलते गरीब उपभोक्ताओं को परेशान होना पड रहा है। बताया जाता है कि दिसंबर का महीना बीतने में महज एक सप्ताह का समय शेष है। किन्तु कई स्थानों में अब तक खाद्यान्न नहीं पहुंच पाया है।

जिसके चलते उपभोक्ताओं को भटकना पड़ रहा है।आलम यह है कि उपभोक्ताओं को दो वक्त की रोटी के लिए साहूकारों से कर्जा तक लेना पड़ रहा है। दरअसल आदिवासी अंचल तामिया में राशन दुकान ही नहीं खुल रही है। बताया जाता है कि यहां अब तक उपभोक्ताओं को वितरण के लिए चावल नहीं पहुंचा है। जबकि अन्य खाद्यान्न की स्थिति भी दयनीय है। किन्तु राशन दुकान संचालक द्वारा दुकान भी नहीं खोला नहीं जा रहा है, यह स्थिति ब्लॉक के अन्य राशन दुकानों की भी है।

सूत्रों की माने तो तामिया और चौरई ब्लॉक की राशन दुकानों में अब तक चावल नहीं पहुंचा है। जबकि दूसरी ओर पीओएस मशीन में स्केनर लगाने का काम भी चलने की जानकारी अफसरों द्वारा दी जा रही है। अब मामला जो भी हो, किन्तु उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्योकि राशन दुकानों से मिलने वाले रैयती दर के खाद्यान्न से ही कई गरीब परिवारों में दो वक्त चूल्हा जलता है। लेकिन जिले में कई ब्लॉकों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है. जिस पर आपूर्ति विभाग भी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

