बैंड-बाजे के साथ निकाली बंदर की अंतिम यात्रा, नम आंखों से ग्रामीणों ने दी विदाई, गांव में छाया मातम,
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ)मध्यप्रदेश के राजगढ़ से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक बंदर की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर छा गई. इतना ही नहीं राविवार की रात बंदर की मौत के बाद ग्रामीणों ने उसका अंतिम संस्कार किया. ग्रामीणों ने बंदर को भगवान हनुमान का स्वरूप मानते हुए पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली,इस घटना के सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बन गई है, लोग ग्रामीणों की सराहना कर रहे हैं.
जंगल से बीमार बंदर की गांव में हुई मौत,,,
पूरा मामला राजगढ़ जिले के खिलचीपुर तहसील के माता रानी की नगरी मीणागांव का है. जानकारी के अनुसार, रविवार को गांव के लोगों को गांव में ही एक बीमार बंदर मिला था. ग्रामीणों ने उसकी देखभाल की और भोजन-पानी की व्यवस्था की,लेकिन रात में उसकी मौत हो गई. सोमवार सुबह जैसे ही बंदर की मौत के खबर फेली, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पूरा गांव शोक में डूब गया.
ग्रामीणों ने पहले तो लगभग 38000 का चंदा एकत्रित किया और फिर हिंदू रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया, इस अनोखी विदाई में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए,गांव के प्रमुख और अन्य ग्रामीणों गाँव के बाहर स्थित शांति धाम में बंदर का अंतिम संस्कार किया गया,वही एक ब्राह्मण के द्वारा मंत्र उच्चारण भी किया गया।
बंदर को माना भगवान का स्वरूप, ,,
गांव के सरपंच प्रतिनिधि रामबाबू नागर ने बताया कि हिंदू धर्म में बंदर को भगवान हनुमान का स्वरूप माना जाता है, इसलिए उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली. यह घटना गांव की धार्मिक भावनाओं और करुणा का अनूठा उदाहरण पेश करती है।
बैंड-बाजे के साथ निकाली बंदर की अंतिम यात्रा, नम आंखों से ग्रामीणों ने दी विदाई, गांव में छाया मातम,
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