बच्चों का भविष्य संकट में, जनजाति विभाग की बड़ी लापरवाही..

Chautha Sthambh

बिछुआ के बीईओ लक्ष्मीकांत मिश्रा के पास तीन तीन संस्था का प्रभार…?

एक ही अधिकारी के पास तीन-तीन प्रभार, पढ़ाई ठप – ग्रामीणों में आक्रोश…

छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ)जिलें के जनजाति विभाग की लापरवाही और मनमानी अब बच्चों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। ऐसा ही देखने को मिल रहा है बिछुआ विकासखण्ड में जंहा एक अधिकारी के पास तीन-तीन संस्था की जिम्मेदारियां होने से शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है।

बीईओ के पास तीन जगह का प्रभार….

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  • जनजाति विभाग के सहायक आयुक्त की मेहरबानी इन दिनों बिछुआ बीईओ पर काफी देख रही है। क्योंकि बीईओ बिछुआ श्री लक्ष्मीकांत मिश्रा जी रोज छिंदवाड़ा से आना-जाना करते हैं उसके बाद भी सहायक आयुक्त महोदय ने इनको तीन संस्थाओं की जिम्मेदारी देकर रखी है जिससे आप समझ सकते हो कि इन संस्थाओं का क्या हाल होगा। जानकारी के अनुसार लक्ष्मीकांत मिश्रा फिलहाल विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बिछुआ, सीएम राइज स्कूल खामरपानी के प्राचार्य और हाई स्कूल मोया के प्राचार्य के रूप में तीन पदों की जिम्मेदारी एक साथ निभा रहे हैं।

    बिछुआ विकासखंड के ग्रामीणों का सवाल…

    बिछुआ विकासखंड के ग्रामीणों ने सहायक आयुक्त महोदय से निवेदन किया है कि बीईओ के पास तीन-तीन जिम्मेदारी है जो हमारे क्षेत्र के स्कूलों की कैसे कैसे सुधरेगा व्यवस्था और कैसे बच्चों को गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल पाएगी जब ऐसे लापरवाही होगी,
    ग्रामीणों और अभिभावकों ने कहा कि जब अधिकारी ही तीन जगह बंधे रहेंगे तो बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान कैसे दिया जाएगा….

    बिछुआ ब्लॉक के ग्रामीणों ने कलेक्टर से की अपील….

    विकासखंड बिछुआ में इन दोनों सरकारी स्कूलों मैं शिक्षा व्यवस्था बेहद खराब है, यंहा स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश शिक्षक जिला मुख्यालय से आते-जाते हैं इसलिए कभी भी समय पर स्कूल नहीं पहुंचते, इसकी मुख्य वजह है कि जब विकासखंड शिक्षा अधिकारी ही जिला मुख्यालय से आएगा तो यहां पढ़ने वाले शिक्षक कैसे होंगे यह आप ही समझ सकते हो इसलिए बिछुआ ब्लॉक के ग्रामीणों ने कलेक्टर महोदय से अपील की है कि तत्काल बीईओ के पास से दो संस्था का चार्ज हटाया जाए और दुसरे शिक्षकों को इन जगहों का प्रभार दिया ताकि बच्चों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके…
    बिछुआ में बच्चे बने प्रयोग का साधन…

    बिछुआ विकासखंड के
    कुछ पालकों का कहना है कि कलेक्टर साहब आप बताइए, ऐसे में बच्चों को सही शिक्षा कैसे मिलेगी हमारे बच्चे पढ़ाई के बजाय प्रयोग का साधन बनकर रह गए हैं।

    स्कूलों की हालत बद से बदतर…
    सूत्रों की जानकारी के अनुसार इन दिनों बिछुआ विकासखंड में संचालित स्कूलों की हालत किसी से छुपी नहीं है कलेक्टर महोदय के दौर के दौरान भी कई शिक्षक स्कूल में अनुपस्थित मिले और कई स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहद कमजोर मिली, लेकिन फिर भी जिलें में बैठे सहायक आयुक्त महोदय ने बिछुआ के बीईओ को तीन-तीन संस्थाओं का चार्ज देकर रखा है…

    स्कूलों का नहीं होता नियमित निरीक्षण….
    बिछुआ विकासखंड में पदस्थ विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं बीआरसी कभी भी विकासखंड में संचालित स्कूलों का निरीक्षण नहीं करते है।प्रशासनिक कामकाज अधर में लटके हुए।शिक्षकों को दिशा-निर्देश समय पर नहीं मिल रहे।विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा।
    जनजाति विभाग की मनमानी पर उठे गंभीर सवाल क्या जिले में योग्य और सक्षम अधिकारियों की कमी है। या फिर जानबूझकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है? शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस तरह का प्रभार वितरण पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है और तत्काल सुधार की ज़रूरत है।

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