कान्या शिक्षा परिसर में सुरक्षा का अभाव….जनजातीय विभाग के उच्च अधिकारी की बड़ी लापरवाही…?

Chautha Sthambh

कन्या शिक्षा परिसर में इससे पहले भी हो चुकी है कई बड़ी घटनाएं…?
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिलें में जनजाति विभाग द्वारा संचालित जिला मुख्यालय में कान्या शिक्षा परिसर की सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं, लेकिन फिर भी विभाग के सहायक आयुक्त इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है, जिसके कारण इस कान्या शिक्षा परिसर में बडी घटनाएं भी हो चुकी हैं…
सुरक्षा के नहीं कोई इंतजाम…?
जिलें के जनजातीय विभाग संचालित सबसे बडी संस्था कान्या शिक्षा परिसर में इन दिनों सुरक्षा के कोई इंतजाम नही है कोई भी बाहरी व्यक्ति बिना रोक-टोक के आते जाते हैं, लेकिन विभाग ने यंहा एक चौकीदार भी रखना ठीक नही समझा जंहा हजारों आदिवासी छात्र निवास करती है…

कान्या शिक्षा परिसर के छात्रावास से एक नाबालिक लड़की हो चुकी थी लापता…?

कान्या शिक्षा परिसर छिंदवाड़ा के छात्रावास से पहले भी एक नाबालिक छात्रा के लापता होने की धटना होने के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था पर आज भी विभाग ध्यान नहीं दे रहे है। जबकि इस धटना ने छात्रावासों की सुरक्षा पर सवाल खड़ी कर दिए थे.. लेकिन कान्या शिक्षा परिसर के प्राचार्या और ना ही जिलें में बैठे जनजाति विभाग सहायक आयुक्त ध्यान दे रहे हैं….

कन्या शिक्षा परिसर में एक शिक्षक के द्वारा छात्र के साथ बेड टच की भी घटना आ चुकी है सामने….
कान्या शिक्षा परिसर छिंदवाड़ा में एक माध्यमिक शिक्षक द्वारा नाबालिक छात्रा के साथ बेड टच की घटना भी सामने आ चुकी है लेकिन फिर भी विभाग कोई ध्यान नहीं दे रहा है…

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  • कन्या शिक्षा परिसर में भी एक लड़की ने की आत्महत्या… कारण आज भी अज्ञात..?

    कान्या शिक्षा परिसर छिंदवाड़ा में एक नाबालिक छात्रा ने सुसाइड कर लिया था लेकिन जनजाति विभाग के सहायक आयुक्त ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था.. जिसके बाद और लगातार कान्या शिक्षा परिसर में कई धटनाएं हो चूकि है लेकिन आज भी सुरक्षा के नहीं है इंतजार..!

    विभाग के कई कर्मचारियों को यहां पर दिया गया है भवन..
    जिलें के कान्या शिक्षा परिसर आदिवासी छात्राओं के लिए सबसे सुरक्षित स्थान है जंहा सरकार ने सर्व सुविधा युक्त छात्रावास एवं यहां पदस्थ कर्मचारियों के लिए भवन बनाए गए हैं लेकिन यंहा पर ना ही छात्रों को सुरक्षित माहौल मिल रहा है और न ही उन्हें खेलने कूदने के लिए कोई सुविधा माहिया कराई जा रही है , यंहा रहने वाली छात्राओं को कैदी की तरह छात्रावास के बंद कैंपस में ही रहना पड़ता है उन्हें खेलने के लिए कोई व्यवस्था भी नहीं है, जबकि यहां पर एक बड़ा ग्राउंड भी खाली है लेकिन फिर भी बच्चों को खेलकूद और कोई व्यायाम तक नहीं कराया जाता है तो कैसी बुनियादी सुविधाएं हैं..

    विभाग के अधिकारी से मिलीभगत करने वाले कर्मचारियों को दिया है भवन…?

    जनजाति विभाग ने अधिकारी से मिलीभगत ऐसे कर्मचारियों को भी यंहा भवन दे दिया गया है जो कान्या शिक्षा परिसर में भी पदस्थ नही है। जबकि ये भवन यंहा पर पदस्थ अधिकारी/ कर्मचारियों के लिए बनाए गए थे ताकि यहां पर रहकर इन बच्चों की देखरेख कर सके और उन्हें अच्छी शिक्षा दे सकें, लेकिन कई ऐसे कर्मचारी यहां रह रहे हैं जो यहां पदस्थ भी नहीं है और 20/20 साल से यहां पर भवन में कब्जा करके रखे हैं, जबकि इन कर्मचारियों के शहर में भी खुद के निजी मकान है उसके बाद भी वह आज भी कन्या शिक्षा परिसर में ही रह रहे हैं .. या फिर अपने रिश्तेदारों को यहां रख रहे हैं…

    रात में भी कान्या शिक्षा परिसर में बिना रोक-टोक होता है आना-जाना…
    आश्चर्य की बात यह है कि जंहा पाँच बजे के बाद कोई भी व्यक्ति कान्या छात्रावास में नही जा सकता है लेकिन इस परिसर में रह रहे लोग रात में कभी भी आना आना-जाना करते हैं और कई ऐसी अधीक्षिका है जिनके परिसर भी साथ में रह रहा है, जिसे सामान्य कान्या परिसर में पदस्थ अधीक्षिका का पूरा परिवार रहता है, यह बात अलग है कि अधीक्षिका निवास छात्रावास से लगा हुआ बना है, लेकिन छात्राओं का यंहा से आना जाना लगा रहता है…आखिर इतनी घटना होने के बाद भी आखिर कब ध्यान देगें जिले में बैठे सहायक आयुक्त महोदय..?

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