छात्रों के साथ मारपीट करने वाला अधीक्षक सुनील सोनी को छात्रावास से हटाया…
हर्रई में नौकरी लगने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाला अधीक्षक जयपाल सरेआम को सौंप संयुक्त छात्रावास…
सहायक आयुक्त सतेंद्र सिंह मरकाम का एक और कारनामा…?
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ ) मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय में जनजाति कार्यविभाग द्वारा संचालित सीनियर संयुक्त बालक छात्रावास में दो दिन पहले अधीक्षक सुनील सोनी ने आदिवासी छात्रों के साथ मारपीट किया था, जिसकी शिकायत छात्रों के द्वारा कलेक्टर महोदय एंव सहायक आयुक्त को किया था, जनजाति कर विभाग ने शिकायत की जाँच किया जो शिकायत सही पाई गई जिसके बाद आज सहायक आयुक्त ने अधीक्षक सुनील सोनी को छात्रावास से हटा दिया है, लेकिन जिलें में आदिवासी छात्रों के साथ मारपीट करने वाले अधीक्षक सुनील सोनी को सिर्फ छात्रावास से हटाकर सहायक आयुक्त ने अधीक्षक सुनील सोनी पर मेहरबानी दिखाई है, लेकिन वही आदिवासी समाज के छात्रों के साथ न्याय नहीं किया गया है.!

नौकरी लगवाने के नाम 7 लाख लेने बाला अधीक्षक को दिया गया संयुक्त बालक छात्रावास का चार्ज…?
छिंदवाड़ा जिलें के जनजाति विभाग में जब तक भ्रष्टाचार को बढ़ाने वाले अधिकारी रहेंगे, कब तक आदिवासी समाज के बच्चों का उत्थान नहीं हो सकता जिसका जीता जागता उदाहरण आज देखने को मिला, एक तरफ आदिवासी बच्चों पर अत्याचार करने वाले अधीक्षक को निलंबित किया गया तो वही दुसरे निलंबित अधीक्षक जिसकी अभी जाँच चल रही है और वो अभी भी निलंबित थें, जिन पर लोगों के साथ नौकरी लगने के नाम पर धोखाधड़ी के कारण उन्हें निलंबित भी सहायक आयुक्त सतेंद्र सिंह जी ने ही निलंबित किया था, लेकिन फिर भी ऐसे अधीक्षक को सहायक आयुक्त ने इन्हें जिला मुख्यालय का इतना बडा छात्रावास का चार्ज कैसे दे दिया यह समझ के पारे है….जबकि निलंबन अवधि में श्री सरयाम का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी जुन्नारदेव नियत किया गया है, लेकिन जब तक जिलें में ऐसे सहायक आयुक्त है तो कल्पना भी कैसी कर सकते हैं..?

सहायक आयुक्त मरकाम के भरोसे के थे अधीक्षक सुनील सोनी…
सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग के सबसे भरोसे के अधीक्षक थे सुनील सोनी इसीलिए दो दिनों तक शिकायत होने के बाद बड़ी मुश्किल से आज सहायक आयुक्त ने उन्हें छात्रावास से हटाकर आपने कार्यालय में नियत कर लिया और इससे यही लगता है कि सहायक आयुक्त ने अधीक्षक सुनील सोनी पर कोई कार्रवाई न करके उनको और बड़ा इनाम दे दिया और अपने कार्यालय में उन्हें पदस्थ कर लिया..! कहीं ना कहीं उन पर कृपा दृष्टि बनाए रखी और उन्हें हटाकर सहायक आयुक्त कार्यालय छिंदवाड़ा में ही नियत किया गया है जबकि जिलें में आदिवासी ब्लॉकों में शिक्षकों की कमी है उसके बाद भी उन्हें जिला मुख्यालय में रखा गया..?
सहायक आयुक्त ने क्या खहा…
जब इस संबंध में सहायक आयुक्त सत्येंद्र सिंह मरकाम जनजाति विभाग से पूछा गया कि 7 लाख की धोखाधड़ी करने वाला अधीक्षक को अपने कैसे सीनियर संयुक्त बालक छात्रावास का चार्ज दे दिया गया जो अभी निलंबित चल रहा है और अभी विभाग की जाँच पूरी नहीं हुई है, तो उनका कहना है कि अभी अस्थाई रूप में रखा गया है उन्हें कुछ दिन में हटा दिया जायेगा, लेकिन ये कैसा आदेश है समझ के बाहर की बात है..?

