देख लो मंत्री जी ! जान की बाजी लगाकर पढ़ने को मजबूर आदिवासी क्षेत्र के बच्चे..?
जर्जर एंव खंडहर भवन की छत के नीचे दहशत के साए में चल रहा जनजातीय विभाग के सरकारी स्कूल….
छिदंवाडा (चौथा स्तंभ ) मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर छोटे बच्चों के भविष्य और जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। तामिया विकास खंड क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक शाला बिजोरी की हालत खस्ता हो चुकी है। स्कूल किसी भी वक्त धराशाई हो सकता है। स्कूल भवन के नाम पर खंडहर भवन की छत सड़ चुकी है। आलम यह है कि हाथ लगाने मात्र से छत का मलबा ढह जाता है। बावजूद इसके जर्जर हो चुके भवन में ही स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

स्कूल में बैठकर पढ़ रहे बच्चे –
स्कूल चलें हम…सब पढ़ें-सब बढ़ें और सर्व शिक्षा अभियान जैसे तमाम सरकारी दावों की पोल खोलती तस्वीर प्राथमिक शाला बिजोरी की है। यहां इलाके के गरीब आदिवासी नन्हे-मुन्ने छात्र जर्जर हो चुके छत के नीचे दहशत के साए में पढ़ने को मजबूर हैं। कहने को तो बिजोरी स्कूल में दो भवन हैं, लेकिन उन दोनों भवन की हालत इस बरामदे से भी खराब है, जहां पहली से लेकर पांचवी क्लास के बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है।
स्कूल में पदस्थ शिक्षिका बताती हैं कि क्या करे स्कूल भवन की दुर्दशा ऐसी ही है, इसकी शिकायत हमारे प्रधानपाठक ने जनजातीय विभाग के अधिकारीयों को पत्राचार से कर दिये हैं। लेकिन अब तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली है। देखकर लगता है कि स्कूल भवन किसी भी वक्त धराशाई हो सकता है।
जनजातीय विभाग छात्रावास मरम्मत के नाम पर हर साल कर रहा करोडो का भुगतान….?
एक ओर जंहा जनजातीय विभाग इन दिनों छात्रावास मरम्मत के नाम पर ठेकेदारों को लाखों, करोडो का भुगतान कर रहे है, लेकिन उनके ही स्कूल भवन आज खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं, लेकिन विभाग में बैठे उच्च अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है और बच्चों की जिंदगी को खतरे में डालकर ऐसे भवन में स्कूल का संचालन कर रहे है.!
सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग से जब इस मामले को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा की में देखता हुँ, लेकिन सवाल है कि यदि स्कूल की ऐसी तस्वीरें देखकर भी यदि इस मामले को गंभीरता से नहीं लेते है तो बडी दुर्घटना हो सकती है ।

