कठपुतली का खेल दिखाते दिखाते गाना सीखा
जज नहीं चैनल तय करते है विजेता, सबके आशीर्वाद और स्नेह से बनाया मुकाम….
छिंदवाडा (चौथा स्तंथ )जब मैं 6 साल का था, तब पिता और दादा के साथ बस्तियों में जाकर कठपुतली का खेल दिखाने जाता था। उसी से घर चलता था। एक दिन डीडवाना नागौर में मामा के दोस्त ने मेरा गाना सुनने के बाद और मेरा वीडियो इंडियन आइडल के ऑडिशन में भिजवाया। इसके बाद मेरा सिलेक्शन हो गया। बस वहीं से मेरी जिंदगी का रास्ता बदल गया। हालांकि फाइनल में पवन और मेरे बीच मुकाबला होना था। जनता ने भी मेरे लिए अच्छी वोटिंग की, लेकिन अंडर 7 में आने के बाद में एलमिनेट हो गया।

यह बात उन्होंने प्रेसवार्ता के दौरान स्थानीय संजू धावा में सबाई भाट ने पत्रकारों को बताई। उन्होंने आगे बताया इंडियन आइडल जैसे बड़े मंच की प्रक्रिया पर बात करते हुए सवाई ने कहा प्रतियोगियों का चयन तो जज करते हैं, लेकिन फाइनल विजेता कौन होगा, ये फैसला चैनल के हाथ में होता है। वोटिंग जरूर होती है, पर निर्णय अंततः चैनल ही करता है।
रियलिटी शो इंडियन आइडल-12 में अपनी गायकी से लाखों दिल जीतने वाले सिंगर सवाई भाट शुक्रवार को छिंदवाड़ा गौरव दिवस पर शहर पहुंचे। वे शाम को स्थानीय दशहरा मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम से पहले सवाई ने महापौर विक्रम आहके के साथ प्रेसवार्ता में अपने संघर्ष, सफलता और संगीत के प्रति समर्पण की कहानी साझा की।

रोजाना दो से तीन घंटे करते है रियाज….
सवाई ने बताया कि गायकी में निखार लाने के लिए नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है। “मैं रोजाना दो से तीन घंटे रियाज करता हूं। उस समय मुझे कोई डिस्टर्ब नहीं करता। इसके अलावा, मैं ऑयली खाना बहुत कम खाता हूं और गले की देखभाल के लिए रोज नमक के गरारे करता हूं।
लता और नुसरत फतेह अली मेरे आदर्श….
संगीत के आदर्श के बारे में बताते हुए सवाई ने कहा, लता मंगेशकर, नुसरत फतेह अली खान, गुलाम अली, बड़े गुलाम अली खान और राशिद खान मेरे संगीत के आदर्श हैं। इन्हें सुन-सुनकर ही मैंने संगीत सीखा है। आज इन्हीं के गाने गाकर अपना जीवन चला रहा हूं। उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहा हूं।
इंडियन आइडल में फिर जाएंगे : सबाई
उन्होंने बताया ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। अभी में इंडियन आइडल के लिए फिर कोशिश करूंगा। मेरे साथ आप सबके के साथ देश की जनता का प्यार है। इस बार आप सबके आशीर्वाद से विनर बनकर आऊंगा।

