गर्भवती महिला ने 10धंटे तक असहनीय दर्द से तड़पती रही…?
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ ) मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिलें के आदिवासी क्षेत्र के एक ऐसी गांव की कहनी जंहा 10धंटे तक एक प्रसूति महिला जिंदगी और मौत से लड़ती रही, अस्पताल तक पहुंचाने में ग्रामीणों के छूटे पसीने…मध्यप्रदेश सरकार की खुली पोल..?
जिला अस्पताल पहुंचने में ग्रामीणों के छोटे पसीने…
जिलें के हर्रई विकासखंड के उंचाखेडा गांव में एक प्रसूति महिला कई धंटे तक तड़पती रही…?
जिलें के हर्रई विकासखंड में एक ऐसा गांव उंचाखेडा जो जंगलो के बीच, चारों ओर उबड -खाबड रास्ता, जंहा मोबाइल नेटवर्क भी नहीं और यदि ऐसे में कोई प्रसूति महिला ऐसी परिस्थिति में फंस जाए तो सोचकर ही मन धबरा जाता है, ऐसी ही धटना आज उंचाखेडा गांव में देखने को मिली है, यंहा एक महिला को लेबर पेन हो रहा था और उसे कोई फैसिलिटी तक नही मिली जिसके कारण वो दर्द से तड़पती रही, तो सोचिए कि उसे महिला पर क्या गुजरी होगी, बात बस यंहा खत्म नहीं होती, बल्कि इससे भी बडा दर्द महिला को झेलना बाकी था..
असुरक्षित प्रसव के कारण बच्चे की मौत.. मां को बचाने ग्रामीणों के छूटे पसीने…?
यह दर्दनाक कहानी छिंदवाड़ा के ऊंचा खेड़ा गांव की है, जंहा महिला ने 1सिंतबर की शाम जिंदगी के लिए खूब संघर्ष किया…भारिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष दिनेश अंगारिया ने बताया कि “ऊंचाखेडा गांव में प्रसव के दौरान एक महिला सकलवति भारिया ने शाम 5.30बजे बच्चे को जन्म दिया, लेकिन असुरक्षित प्रसव के कारण बच्चा मृत पैदा हुआ… महिला की बर्थ कैनाल फटने से अधिक खून बहना शुरू हो गया.. महिला का धर गांव से काफी दूर होने के कारण उसे तुरंत हेल्थ सब-सेंटर या अस्पताल नहीं ले जाया जा सका.. यदि तुरंत स्वास्थ्य सुविधा मिल जाती तो प्रसव के दौरान अपना बच्चा नहीं खोना पड़ता..

जिला अस्पताल ले जाती महिला की तस्वीर…
जब इस बात की जानकारी स्वास्थ्य कर्मियों को मिली.. उन्हें सब-सेंटर लाने के प्रयास शुरू किया गया.. लेकिन जंगलो के बीच चिलक से 16कि. मी की दूरी में बसे उंचाखेडा गांव में उस समय तेज मूसलाधार बारिश हो रही थी, बिजली नहीं थी, मोबाइल नेटवर्क भी नहीं था, अगर गलती से नेटवर्क मिलने की उम्मीद भी होती तो गांव में बिजली नहीं होने के कारण सभी के फोन डिस्चार्ज थे, ऐसी परिस्थिति में भी स्वास्थ्य कार्यकर्ता एएनएम ने स्कूटी से वंहा पहुंचने का प्रयास किया, चूंकि उस दिन साप्ताहिक हाट बाजार था, क्षेत्र के अधिकांश लोग, वंहा मदद के लिए मौजूद नही थें..
टैक्टर भी दलदल में फंसा, डोली बनी सहारा.
मोहन सरकार प्रदेश में सभी को स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है, हम बात कर रहे है हर्रई ब्लॉक के ऊंचाखेडा की जंहा प्रसव पीड़ा से तड़पती एक महिला को कठिन परिस्थितियों में 7.30 टैक्टर से महिला के ले जा रहे थे लेकिन 12: 30 बजे जब अस्पताल की तरफ ट्रैक्टर आ रहा था तो 2 किलोमीटर पहले ही वह रास्ते में दलदल में धंस गया.. तब महिला के परिजनों ने ड्राइवर और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कपड़े की झोली बनाकर कंधे पर उठाकर महिला सकलवती को रात लगभग 2 बजे सब सेंटर तक पहुंचाया गया..

16कि.मी का सफर 10धंटे में हुआ तय…?
इस पूरी धटनाक्रम में 5.30बजे डिलीवरी से लेकर अस्पताल पहुंचने तक महिला ने 10धंटे तक संघर्ष किया ऊंचा खेड़ा गांव से हेल्थ सब सेंटर की दूरी 16 किलोमीटर तक है, लेकिन इस सफर को तय करने में महिला और मददगार ग्रामीणों को एडी चोटी एक करना पडा,,
जिंदगी के लिए जूझ रही महिला को अस्पताल पहुंचने में 10 घंटे का लगा समय.. आखिर जिम्मेदार कौन…?
छिंदवाड़ा जिलें विकास का दावा करने वाले यह खबर जरूर पढ़ें.. इस खबर से जिला का विकास देखता है जंहा एक प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को लाने के लिए 16 किलोमीटर में लगे 10 घंटे,तो आप समझ सकते हो कि छिदंवाडा जिले का कैसा विकास हुआ है, जी हाँ हम बात कर रहे है हर्रई विकासखंड के तिलक के पास ऊंचाखेड़ा गांव की जो जिलें के अंतिम छोर में है गांव, सडक ऐसी की रेंग रहा था टैक्टर…
ऊंचाखेडा 70 धर की बस्ती यंहा 500से 600लोग करते है निवास…
ऊंचाखेडा गांव छिंदवाड़ा के अंतिम छोर और नर्मदा पुरम और नरसिंहपुर बॉर्डर से लगा हुआ है, सड़क इतनी खराब है कि ट्रैक्टर कछुआ गति से रेंग रहा था..
कलेक्टर ने चिलक में कई बार लगाई रात्रि चौपाल….
जिलें के कलेक्टर एंव सभी विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने छिंदवाड़ा जिले के हर्रई विकासखंड के चिलक में लगभग चार बार यहां पर रात्रि चौपाल लगाई गई, मगर उसके निकटवर्ती गांव की समस्या नहीं देखी, कलेक्टर एवं अधिकारियों को यह नहीं देखा कि इन गांव में आज भी सड़क नहीं है, जहां लोगों को बरसात में पैदल चलते तक नहीं बन रहा है…
हर्रई बीएमओ का कहना..
सिविल हॉस्पिटल हर्रई की ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर रानी वर्मा ने बताया कि “सकलवति भारिया की उम्र करीब 23 साल है. उनका हीमोग्लोबिन भी कम था. उन्हें 10 दिन पहले स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने बर्थ वेटिंग होम में एडमिट होने के लिए सलाह दी थी, लेकिन उनके परिजनों ने कहा कि घर में ही प्रस्ताव कराएंगे बच्चा स्टिललबर्थ था.” महिला को हेल्थ सब-सेंटर से छिंदवाड़ा जिला अस्पताल ट्रांसफर किया गया. जहां वह अभी भर्ती है.

