बच्चों के भोजन में भी लापरवाही, मीनू के हिसाब से नही मिल रहा भोजन..?
स्कूली नन्हे मुन्ने बच्चों से शिक्षक भरवा रहे पानी, धुलवाते है बर्तन…!
छिंदवाड़ा(चौथा स्तंभ )जिलें में सरकारी स्कुलों में शिक्षक की बडी लापरवाही देखने को मिल रही है,जंहा बच्चों को शिक्षा देने की जगह उन स्कुली बच्चों से पानी भरवाने की बात सामने आई है, वही बच्चों वीडियो मैं साफ दिख रहे हैं कि उनके द्वारा बर्तन साफ किया जा रहे हैं..

पूरा मामला तामिया के प्राथमिक शाला पटेलढाना डोब का…
छिंदवाड़ा जिलें के तामिया विकासखंड के पटेलढाना डोब में इन दिनों शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने की जगह उन से बर्तन धुलवा रहे हैं एवं पानी भरवा रहे हैं,
बच्चों का कहना, स्कूल में रोज हमें पानी भरना पडता है और बर्तन भी हमें ही धोने पड़ते हैं..

बच्चों को आकर्षित करने और उन्हे पोषण प्रदान करने के मकसद से मध्यान्ह भोजन योजना चलाई….
सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को स्कूल के प्रति आकर्षित करने और उन्हे पोषण प्रदान करने के मकसद से मध्यान्ह भोजन योजना चलाई जा रही है। बच्चों को पोषण मिले इसके लिए शासन ने हर दिन दिए जाने वाले भोजन का मीनू भी तय कर रखा है। मीनू के मुताबिक खाना देने के लिए सरकार राशन व रुपए भी खर्च कर रहा है। लेकिन ज्यादातर स्कूलों में मध्यान्ह भोजन में गड़बड़ी की जा रही है।
तामिया के पटेलढाना डोब के प्राथमिक शाला में नही मिल रहा बच्चों को मीनू के हिसाब से भोजन…
तामिया विकासखंड के आदिवासी क्षेत्र की ग्राम पंचायत डोब की प्राथमिक शाला पटेलढाना में सरकार के द्वारा बच्चों को मिलने वाला मध्यान भोजन में गंभीर अनियमितता देखने को मिली, यंहा नियमों की ताक पर रखकर बच्चों को मीनू के हिसाब से भोजन नहीं दिया जा रहा है और मनमर्जी से यहां स्वशासन समूह के द्वारा भोजन दिया जा रहा है, आदिवासी अंचल में शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों को मीनू के हिसाब से भोजन नहीं दिया जा रहा है…

गुरुवार के मीनू को हिसाब से नहीं दिया गया भोजन…
सरकारी स्कूल में बच्चों को आकर्षित करने और उन्हे पोषण प्रदान करने के मकसद से मध्यान्ह भोजन योजना चलाई जा रही है।लेकिन सरकार की योजना में पानी फिरते देख रहे हैं स्व सहायता समूह, क्योंकि आज मीनू के हिसाब से स्कूल के बच्चों को वेजिटेबल सब्जी वाला पुलाव और कढ़ी पकोड़ा खाने में देना था लेकिन यंहा सिर्फ बच्चों को चावल में दाल और हल्दी डालकर पुलाव बना दिया गया और बच्चों को दिया गया जो गुणवत्तायुक्त भी नहीं था… बच्चों ने बताया हमें हमेशा ऐसा ही खाना दिया जाता है..
स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार शिक्षकों एंव समूह की कडी आलोचना किया….
स्थानीय लोगो का कहना है कि बच्चों को भोजन कैसे मिल रहा है इस की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होती है लेकिन शिक्षक और समूह की मिलीभगत से हमारे बच्चों को मीनू के हिसाब से कभी भोजन नहीं मिलता है, जबकि सरकार इन सबको लिए पैसे दे रही है, लगता है शिक्षक एवं समूह की मिलीभगत से ये सब खेल चल रहा है…

खराब खाना से बच्चों के स्वस्थ्य पर प्रभाव…
स्थनीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार स्कुल के बच्चों के लिए मीनू के हिसाब से भोजन देने के लिए राशि दे रही है ताकि बच्चों को अच्छा भोजन मिल साके और वो स्वस्थ रहें लेकिन स्व सहायता समूह वाले इसकी विपरीत चल रहे हैं और मध्य प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण योजना की सफलता पर सवाल खड़ा करती है, अब देखना है कि प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर मामले में क्या कोई ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर…?

