जब सूरज डूबता है तो हमारे गांव की जिंदगी भी थम जाती है”, साहब
पातालकोट के भारिया समाज के ग्रामीणों का छलका दर्द….
छिंदवाड़ा / मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया के पातालकोट में आखिर आजादी के इतने सालों बाद भी इन गांव में पानी बिजली सडक के लिए तरस रहे ग्रामीण…
इन गांव के ग्रामीणों ने आज कलेक्टर कार्य पहुंच कर अपना दर्द बताया, साहब आज भी हमारे गांव में बिजली पानी और सडक तक नही है विशेष बातचीत की. लोगों ने अपना दर्द बयां किया
. धूरनी निवासी कमल सिगं भरिया ने बताया कि हमारा गांव पाताकोट के वनांचल क्षेत्र में आता है हम कलेक्टर कार्यालय इसीलिए आये हैं, क्योंकि हमारे गांव में बिजली नही हैं. पानी नही है न ही सडक है इसलिए साहब हम अंधेरे में रहते है हमको बहुत दिक्कत होती है.

गर्मी बारिश में बच्चे रोते हैं तो बहुत परेशानी होती है लेकिन साहब इतनी शिकायते के बाद भी हमारे गांव में बिजली नहीं पहुंची.
मुन्ना लाल भारिया ग्रामीण
‘जीना दूभर हो गया’:
मुन्नालाल भारिया ग्राम डोमनी ने बताया कि हमारे गांव के आसपास के दर्जनों गांव आज भी मूलभूत सुविधा से दूर हैं. हम अब भी पिछड़े हुए हैं और आज भी जंगल में भटक रहे है. बिजली के अभाव में हमारा जीवन दूभर हो गया है. लेकिन यदि शहर में अगर आधे घंटे के लिए बिजली चली जाए तो हाहाकार मच जाता है, लेकिन हम लोग जब से जन्म लिए बिजली नहीं देखे….
अब तक तीन पीढ़ी हो गई लेकिन आज भी हम बिना बिजली के गुजारा कर रहे हैं. इसलिए हम शासन प्रशासन से मांग करते हैं कि जल्द ही हमारे गांव में बिजली का प्रबंध हो.
बारिश में लकडी जलाकर रोशनी करना पडता है…
जी हाँ हम बात कर रहे है छिंदवाड़ा जिलें के तामिया पातालकोट की जंहा आजादी के इतने साल होने के बाद भी इन गांव में आज भी बिजली पानी, सडक के लिए आदिवासी समाज के लोग मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे है.. लेकिन साहब सोचने की बात है कि सरकार जंहा विकास की बात करती है लेकिन आज भी छिंदवाड़ा जिले के पातालकोट के दर्जनों गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकारी तंत्र के सामने हाथ पैर जोड़ते दिख रहे हैं…
कमल सिंग भारिया ग्रामीण
अंधेरे में आज भी जीवन यापन कर रहे…
तामिया पातालकोट के आदिवासी भारिया समाज के लोग आज भी बिना बिजली सडक के जीवन जीने के लिए विवाश नजर आ रहे है लेकिन इनकी समस्या हाल करने वाला कोई नहीं…
करोड़ को बजट मिलने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे आदिवासी भरिया….
केंद्र एवं राज्य सरकार के आदिवासी भारिया समाज के उत्थान के लिए सरकार करोडो का बजट दे रही है जिसके लिए जनजातीय विभाग में बस्ती विकास के नाम से करोड़ों का बजट आ रहा है लेकिन बजट कहा जा रहा है किसी को मालूम नहीं, आखिर किसका विकास हो रहा है ये समझ के परें है
बिजली नहीं, सड़क नहीं, डॉक्टर भी नहीं: कमल सिंह भारती ने बताया कई बार शिकायत की गई है, मांग की गई है लेकिन मांग करते करते सब थक चुके हैं. बिजली के अलावा भी कई मूलभूत समस्याएं हैं.

बच्चों का भविष्य अंधकार में…
मुन्नालाल भारती ने बताया कि हमारा गांव आदिवासी बहुल क्षेत्र है. हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री हम गरीब आदिवासी भरिया समाज की ओर कब ध्यान देगे , ग्रामीण मुख्यमंत्री जी से पूछ रहे है कि आखिर हमारे गांव में बिजली, सडक, पानी कब पहुंचेगा . क्योंकि साहब हमारे बच्चे पढ़ नहीं पाते. आज आधुनिक युग है और ऑनलाइन शिक्षा मिलती है, लेकिन हमारे बच्चों को भविष्य अंधकार में है. कलेक्टर साहब को समस्या बताए हैं तो उन्होंने आश्वासन दिया है. हमें उम्मीद है कि समस्या का समाधान करेंगे..
बिजली विभाग के चक्कर लगा रहे:
भरिया समाज के ने ग्रामीणों ने बताया कि बिजली विभाग के पास जाते हैं लेकिन उन्होंने आज तक हमारी समस्या नहीं सुनी और बोलते है आपको जंहा शिकायत करना है कर सकते तो बिजली विभाग के अधिकारी ऐसा बोलते है
ग्रामीणों ने बताया हमारे पूर्वज वर्षों से यहां रहते हैं…
भरिया समाज के लोगो ने बताया कि हमारे पूर्वज जब से बसे हैं, तब से यहां का वातावरण शुद्ध है. यहां रहना अच्छा लगता है. यह हमारी जन्मभूमि है, इसलिए बिजली नहीं होने के बावजूद भी गांव छोड़कर नहीं जाना चाहते. पहले हमारे पूर्वज बिजली की मांग करते थे, अब हम और हमारे बच्चे बिजली की मांग कर रहे हैं. गांव के बच्चे बिजली नहीं होने की वजह से कंडेल, चिमनी, मोमबत्ती जलाकर पढ़ते हैं. कंप्यूटर क्या चीज है, उसको हमारे बच्चे नहीं जानते- और अब तो मिट्टी तेल भी नही मिल रहा है तो क्या करें..?
स्पेशल रिपोर्ट
ठा. रामकुमार राजपूत
मोबाइल -8839760279

