ग्वालियर का गोपाल मंदिर 100 साल पुरानी आस्था सिंधिया राजवंश की अनमोल धरोहर
चौथा स्तंभ /ग्वालियर का इतिहास जितना समृद्ध और गौरवशाली है उतना ही आस्था और भक्ति से भी जुड़ा हुआ है। इसी आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक है फूलबाग स्थित गोपाल मंदिर जिसे ग्वालियर के प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 100 साल पहले हुआ था उस समय से लेकर आज तक यह मंदिर भक्ति और विश्वास का केंद्र बना हुआ है
सिंधिया राजवंश का ग्वालियर के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में विशेष योगदान रहा है। वर्ष 1921 में महाराज माधवराव सिंधिया प्रथम ने इस मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार करवाया। इसके साथ ही भगवान राधा कृष्ण के श्रृंगार के लिए उन्होंने बेशकीमती आभूषण भी बनवाए इन आभूषणों में हीरे पन्ना माणिक और सोने के आभूषण शामिल हैं। इन गहनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें आज भी हर साल जन्माष्टमी पर भगवान के श्रृंगार के लिए उपयोग किया जाता है
श्रृंगार की इस परंपरा को निभाने के लिए खास सुरक्षा इंतज़ाम किए जाते हैं। जन्माष्टमी से पहले ये गहने बैंक के लॉकर से निकाले जाते हैं और कड़ी निगरानी के बीच मंदिर तक लाए जाते हैं इसके बाद भगवान राधा कृष्ण का श्रृंगार किया जाता है और श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बनते हैं
जन्माष्टमी के मौके पर गोपाल मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान के इस श्रृंगार के दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं यही वजह है कि ग्वालियर ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए यहां आते हैं
आज इस मंदिर की देखरेख ग्वालियर नगर निगम द्वारा की जाती है नगर निगम समय-समय पर मंदिर के रखरखाव और व्यवस्था पर विशेष ध्यान देता है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो