मुख्यालय से नदारद शिक्षक, फिर भी वसूल रहे हाउस रेंट!…

Chautha Sthambh

मुख्यालय से नदारद शिक्षक, फिर भी वसूल रहे हाउस रेंट!…

छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) जिलें के आदिवासी
क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों में पदस्थ कई शिक्षक नियमों को ताक पर रखकर मुख्यालय में निवास नहीं कर रहे हैं, फिर भी मकान किराया भत्ता (हाउस रेंट) का लाभ उठा रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि संबंधित कर्मचारी को अपने पदस्थ मुख्यालय में ही निवास करना अनिवार्य है, ताकि विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो।
इसके बावजूद अधिकांश शिक्षक प्रतिदिन अपने घरों से लंबी दूरी तय कर स्कूल पहुंच रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि मुख्यालय में निवास न करने के बावजूद संबंधित शिक्षकों द्वारा हाउस रेंट का लगातार भुगतान लिया जा रहा है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन और शासकीय राशि के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
सबसे गंभीर स्थिति आदिवासी अंचलों में संचालित विद्यालयों में बताई जा रही है, जहां कई शिक्षक जिला या तहसील मुख्यालय से आना-जाना करते हैं। ग्रामीणों और पालकों का आरोप है कि इस वजह से स्कूल समय पर नहीं खुलते, शिक्षक देर से पहुंचते हैं और जल्दी लौट जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

ऐसी शिक्षक जो हाउस रेंट ले रहे हैं उनका होना चाहिए भौतिक सत्यापन…

ग्रामीणों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, शिक्षकों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और जो कर्मचारी नियमों के विरुद्ध हाउस रेंट ले रहे हैं, उनसे राशि की वसूली कर कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रशासनिक स्तर पर यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षा व्यवस्था पर इसका दूरगामी असर पड़ सकता है।

शिक्षकों के निजी मकान होने के बाद भी रह रहे हैं कान्या शिक्षा परिसर के मकान में…..?

जी हाँ ऐसा ही मामला जिला मुख्यालय के कन्या शिक्षा परिसर में देखने को मिला है जंहा दर्जनों शिक्षक एवं कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी निजी मकान होने के बाद भी वह कन्या शिक्षा परिसर के मकान में रह रहे हैं जबकि उनका खुद का निजी मकान जिला मुख्यालय में है, ऐसे शिक्षक का भौतिक सत्यापन होना चाहिए और यदि ऐसे शिक्षक जो गलत तरीके से यंहा रह रहे है उनसे हाउस रेंट की वसूली की जानी चाहिए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए….

हाउस रेंट अलाउंस एचआरए) के नियम….

  1. एचआरए की दरें: एचआरए की दरें शहरों की श्रेणी के आधार पर निर्धारित की जाती हैं:
  • ए-1 शहरों (मेट्रो शहरों) में 24% से 30% तक
  • ए शहरों में 18% से 24% तक
  • बी-1 और बी-2 शहरों में 16% से 18% तक
  • सी शहरों में 10% से 16% तक
  1. एचआरए की गणना: एचआरए की गणना बेसिक पे (बुनियादी वेतन) के आधार पर की जाती है।
  2. एचआरए के लिए आवश्यक दस्तावेज: शिक्षकों को एचआरए के लिए निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं:
  • आवास का रेंट एग्रीमेंट (अनुबंध)
  • रेंट रसीदें
  • आवास का पता प्रमाण

क्या जनजातीय विभाग के बीईओ और जिलें में बैठे अधिकारी ऐसे शिक्षक/शिक्षिका जो हाऊस रेट ले रहे है उनका भौतिक सत्यापन होना चाहिए

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